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बच्चों के अंदर किस प्रकार से शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखेंगे

हमारे प्रिय पाठको आज हम एक महत्वपूर्ण विषय  पर अनेक महत्वपूर्ण बातें आपको बताने जा रहे हैं| यह आपके परिवार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है |इस विषय को हम अपने अनुभव के आधार पर  लिखने जा रहे हैं| आप किस तरह से अपने बच्चे को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखेंगे| इसके बारे में कई प्रकार के महत्वपूर्ण जानकारियां हम आपको इस लेख में अवगत कराएंगे |वर्तमान समय में स्थिति समाज में सामाजिक स्थिति बहुत ही दयनीय है |आज के समय में माता पिता के पास समय नहीं होने के कारण या काम में व्यस्त होने के कारण वाह ठीक प्रकार से अपने बच्चों को देखभाल नहीं कर पाते हैं| जिसका परिणाम धीरे-धीरे बच्चे के अंदर मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर काफी प्रभावित करता है| किस प्रकार से बच्चों को हम देखभाल शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने में सहायक होगा जो इस लेख में आगे हम अपने अनुभव के आधार पर आप लोग को अवगत कराएंगे|

*. बच्चों के माता-पिता अपने बच्चे के दिनचर्या के बारे में आकलन जरूर करें वह किस प्रकार से अपने दिनचर्या को मैं कार्य एवं रहन सहन करता है|



* बच्चों के उम्र के अनुसार शारीरिक एवं मानसिक का विकास  परिवर्तन होता है | इस तरह के शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन से बच्चों के अंदर में नई नई चीज देखने की उत्सुकता और जानने की जिज्ञासा बढ़ जाती है  |लेकिन कम उम्र के बच्चों या आकलन नहीं कर पाता है कि वह उसके लिए कौन सा चीज लाभदायक है और कौन सा चीज उसके लिए हानिकारक है| इस समय बच्चे के परिवार के द्वारा सही तरह से देखरेख कर गलत और सही का सुधार बच्चों के अंदर करने में सहायक होता है|


* वर्तमान समय में इस आधुनिक युग में बच्चों मोबाइल टेलीविजन आदि की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं |आज के समय बच्चों के अंदर मोबाइल्स से खेलने की लालसा लगभग 3 वर्ष से ही चालू हो जाता है |बच्चों के अंदर इस विवेक शक्ति के उत्पन्न होने से मानसिक रूप से अनेकों प्रकार के परेशानियां बच्चों के अंदर उत्पन्न हो जाती है |इस बात को ध्यान में रखकर बच्चों के माता-पिता ध्यान रखना चाहिए|


* आज के वर्तमान समय में कई बच्चे मोबाइल पर गेम खेलने कि और अधिक झुकाव होता जा रहा है और बच्चे धीरे-धीरे मैदान मैं खेल की ओर झुकाव निरंतर कमी होता जा रहा है| जिससे इस प्रकार के बच्चों के अंदर जो बच्चे मोबाइल पर गेम ज्यादा खेल खेलते हैं  |उनके अंदर शारीरिक दुर्बलता अधिक पाई जाती हैं वनस्पति खेल के मैदान के बच्चों उपेक्षा|

* आज वर्तमान समय में बच्चों के अंदर खानपान की प्रक्रिया में भी परिवर्तन होता जा रहा है| आज के बच्चे जंक फूड की ओर ज्यादा खाने के लिए आकर्षित हो रहे हैं |जो उनको स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जंग फूड हानिकारक होता है | ऐसी परिस्थिति में ध्यान में रखकर माता-पिता बच्चों को जंक फूड से दूर रखें जिससे बच्चों के अंदर स्वास्थ्य को प्रभावित ना कर सके |

* वर्तमान समय में अधिकांश बच्चों में उत्तेजना मानसिक भावना उत्पन्न हो रही है माता-पिता और अपने परिवार के सदस्य से   छोटी छोटी बात पर बच्चे  बहुत ही जल्द उत्तेजित हो जा रहे| हैं इस तरह की मानसिकता बाले  बच्चों के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से  बहुत ही हानिकारक है |कई मनोवैज्ञानिकों का कहना है  कि बच्चों के अंदर उत्तेजना की भावना  जल्द जल्द बन्ना बच्चों के मानसिक स्थिति के लिए घातक होता है |इस तरह के बच्चे ज्यादा उग्र प्रवृत्ति के होते हैं इससे माता-पिता को धीरे धीरे विधियों से सुधारा जा सकता है |

*बच्चों के अंदर  किसी घटना  या किसी वस्तु की जानकारी जानने लालसा का अधिक पाया जा रहा है कम उम्र के बच्चे अच्छे और बुरे स्थितियां बातों को नहीं समझ पाते हैं इस समय माता पिता को बहुत ही प्यार से समझा कर किसी अच्छे चीज को जानने की लालसा की भावनाओं को अधिक उत्पन्न करने में सहायक कार्य करें|



* बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने के लिए उनके माता-पिता ऐसे दिनचर्या का नियम या कार्य बच्चों को दें |जिसे उन्हें शारीरिक श्रम पर अधिक प्रभावित करे इस विधि को अपनाने के लिए बच्चे के माता-पिता उसके उम्र के अनुसार कार्य करें |जिससे बच्चा शारीरिक मेहनत करने से उसके अंदर शारीरिक क्षमता एवं शक्ति का संपूर्ण विकास हो सके

* बच्चों के उम्र के अनुसार पौष्टिक आहार जिसमें न्यूट्रीशन की मात्रा अधिक हो बच्चों को खिलाते रहना चाहिए |बच्चों के भोजन में एक बार अधिक भोजन नहीं कराना चाहिए| थोड़ी-थोड़ी समय पर हल्की हल्की मात्रा में खाने का पदार्थ देते रहना चाहिए |जिससे बच्चे के अंदर पाचन प्रक्रिया एवं पोस्टिक का शरीर के अंदर आसानी से पहुंच जाए| जिससे बच्चों को भरपूर पौष्टिक आहार मिले|


* आज हम वर्तमान समय में देखते हैं की कम उम्र के बच्चों को आंख में चश्मा दूर दृष्टि दोष एवं अन्य प्रकार के शारीरिक दुर्बलता अधिक पाई जा रही है |इसका मुख्य कारण है बच्चों का खान पान एवं रहन सहन हम इस लेख में बताना चाहते हैं| कि आज के माता पिता अपने बच्चों को हरी सब्जियां ताजे फल आदि की सेवन अधिक कराएं| जिसे बच्चों के अंदर विटामिन की कमी नहीं हो पाएगी और इस तरह के और रोगों से बच्चे के अंदर होने की संभावनाएं कम रहेगी|


* यदि बच्चों का उम्र 14 से 15 साल हो जाए तो माता-पिता को बच्चों के साथ एक दोस्त जैसा व्यवहार करना चाहिए | बच्चे मैं अपनी गलत एवं सही बात है माता-पिता से बता पाए और माता पिता सही और गलत बातें बच्चों को समझा सके| माता पिता को अपने घर की समस्या आदि का भी बच्चों को बातों के द्वारा आदान प्रदान करते रहे |जिससे बच्चों को माता पिता के बातों को समझना आसानी होता है |इस तरह के व्यवहार से बच्चों के अंदर मानसिक शक्ति में परिवर्तन एवं सोचने की क्षमता मैं बढ़ोतरी होती है |इस तरह बच्चे माता-पिता क्या हर बातों को सुनते हैं और एक सही दिशा पर कार्य करते हैं |आज के वर्तमान समय में भागदौड़ के समय में हर माता-पिता को हर दिन इस तरह का कम से कम एक घंटा समय इस उम्र के बच्चे के साथ देना चाहिए बच्चे अपने भविष्य या अपने गुण से पत्ते नहीं हैं एवं अपने जीवन में एक सफल नागरिक क्या सफल व्यक्ति बन पाते हैं इस विधि से बच्चों के अंदर मानसिक एवं शारीरिक विकास में सहायक होता है


स धन्यवाद
प्रवीण कुमार सिंह
एमए हिस्ट्री बीपीएड एन आई एस

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